क्या होता है पत्रकार? क्या होती है पत्रकारिता?

संवेदनशील पत्रकार को मुद्दों की समझ होती है। राजनीतिक व्यवहार का एनालिसिस करके तब लिखता है। आपके मर्म और टीस को ज़िंदगी भर की कमाई से मिले शब्दों से आवाज देता है। सत्ताधारियों के ख़िलाफ़ वास्तविकता लिखता है तो आप नाराज़ हो जाते हैं। उसके ख़िलाफ़ संस्थान को पत्र लिखते हैं। उसे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ता है फिर आप कहते हैं 'मीडिया बिक गया'। पत्रकारों का भी परिवार होता है। आपको मुसीबत में पत्रकार से उम्मीद होती है। पत्रकार को मुसीबत में आपकी ज़रूरत होती है। ये 'इस हाथ से लो', 'उस हाथ से दो' वाला नियम है।

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