पूर्व पीएम राजीव गांधी को आज का मुसलमान किस नजरिए से देखता है ?
पूर्व पीएम राजीव गांधी की आज 32वीं पुण्यतिथि है। वीरभूमि पहुंचकर कांग्रेस के दिग्गजों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है जिनमें पत्नी सोनिया गांधी, बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल रहे। पीएम मोदी ने उनके लिए लिखा 'मैं पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन करता हूं'। देशवासियों ने राजीव गांधी को याद किया है जो कि स्वाभाविक भी है और हमेशा याद किए जाएंगे पर सवाल ये है कि देश का मुस्लिम वर्तमान समय में राजीव गांधी को किस संदर्भ में याद कर रहा है? इस सवाल का जब जवाब टटोलने के लिए आप जमीनी हकीकत देखते हैं तो आपको राजीव के प्रति मुस्लिम समुदाय की भावनाएं बिल्कुल उलट दिखती हैं। उनको लगता है कि उनके हाथ से बाबरी मस्जिद वीएचपी ने नहीं बल्कि राजीव के नेतृत्व में कांग्रेस ने छीनी है। वो आज भी सवाल करते हैं कि राजीव गांधी ने बाबरी मस्जिद का ताला किस डील के तहत खुलवाया था? उनको लगता है कि जब बाबरी मस्जिद का ताला खुलवाया गया तब उत्तर प्रदेश और केंद्र दोनों ही जगह कांग्रेस की ही सरकार थी और जो भी हुआ वो कांग्रेस की जाहिरा में हुआ पर ऐसा नहीं है। ये व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का झूठा ज्ञान है। ये कांग्रेस से द्वेष की भावना रखने वाले कुछ षडयंत्रकारियों का क्रूरतम प्रोपेगंडा है। 07 अगस्त 2020 को दिल्ली से बीबीसी के संवाददाता फ़ैसल मोहम्मद अली अपनी रिपोर्ट में लिखते हैं कि "बाबरी मस्जिद का ताला राजीव गांधी के कहने पर खुलवाए जाने और इसका इस्तेमाल शाह बानो मामले (मुस्लिम तुष्टीकरण) बनाम राम मंदिर करने की बात सरासर झूठ है. सच तो ये है कि पूर्व प्रधानमंत्री को एक फ़रवरी, 1986, को अयोध्या में जो हुआ उसका इल्म तक नहीं था और अरुण नेहरू को मंत्री पद से ड्रॉप किए जाने की यही वजह थी।" ये बात राजीव गांधी के प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में तत्कालीन संयुक्त सचिव और दून स्कूल में उनके जूनियर रहे पूर्व आईएएस अधिकारी वजाहत हबीबुल्लाह ने बीबीसी से एक ख़ास बातचीत में कही।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें