आंदोलन को कामयाब बनाने के लिए कभी ना हारने वाला जज्बा चाहिए होता है।

रेसलर्स पहली बार बृजभूषण के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करने के लिए बीती 18 जनवरी को जंतर-मंतर पर बैठे। पहलवानों ने WFI के अध्यक्ष पर यौन शोषण के बेहद गंभीर आरोप लगाए। केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने रेसलर्स से बात की, उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया तो पहलवानों ने 21 जनवरी को अपना धरना-प्रदर्शन खत्म कर दिया जिस पर बाद में विनेश फोगाट ने खाप पंचायतों से माफी मांगी कि "हमसे गलती हो गयी थी, आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई इसलिए हम दोबारा से जंतर-मंतर पर बृजभूषण के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, हमारा सपोर्ट कीजिए"। खाप पंचायतों ने अपना समर्थन दे दिया। 3 मई की रात पहलवानों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प हुई। सुबह होते-होते दोनों तरफ से संगीन आरोप लागए गए। पहलवानों ने बताया कि "दिल्ली पुलिस का अफसर नशे में था और उसने हम लोगों के साथ ज्यादती की"। इस बात को लेकर वे मीडिया के सामने खूब भावुक हुए। नतीजतन दूसरे ही दिन जंतर-मंतर पर पहलवानों के समर्थन में विपक्ष के कई दिग्गज नेताओं के साथ दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाति मालीवाल नज़र आईं और उन्होंने भी दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया कि "उन्हें पुलिस ने पहलवानों से मिलने नहीं दिया, उनके साथ हाथापाई की गई"। तभी केंद्र सरकार को सजक हो जाना चाहिए था लेकिन सरकार तब भी कान में ठंडा तेल डाले सोती रही। भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्षा और राज्यसभा की मनोनीत सांसद पीटी उषा ने भारतीय ओलंपिक संघ की कार्यकारी समिति की बैठक के बाद कहा कि "रेसलर्स का जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन करना अनुशासनहीनता है और इससे देश की छवि खराब हो रही है"। जिसके बाद वे पहलवानों से बात करने के लिए धरना स्थल पहुंचीं। पहलवानों ने उनकी एक ना सुनी। मीडिया के सवालों से पीटी उषा बचती नज़र आईं। आनन-फानन में अपनी गाड़ी में बैठीं और वापस चली आईं। सरकार को तभी समझ जाना चाहिए था कि आंदोलन हिम्मत वालों का है। विनेश फोगाट, साक्षी मालिक, बजरंग पुनिया, इन तीनों पेशेवर पहलवानों ने मीडिया के सामने आकर रोकर कहा कि वो अपने मेडल्स सरकार को वापस कर देंगे "जब पहलवानों कि कोई बात सुनने को तैयार ही नहीं है तो वो इन मेडल्स का क्या करेंगे ?"। सरकार को तभी विचार करना चाहिए था कि "पहलवान बड़ी बात बोल रहे हैं, हमें कुछ सोचना चाहिए" लेकिन तभी भी ऐसा कुछ नहीं हुआ। महिला पंचायत ने आह्वान कि "पहलवानों के समर्थन में नई संसद भवन के उद्घाटन वाले दिन ही नई संसद के बाहर भारी संख्या में पहलवानों के साथ प्रदर्शकारी पहुंचकर धरना-प्रदर्शन करेंगे"। महिला पंचायत की इस चेतावनी से भी सरकार के सिर में जूं तक नहीं रेंगी हालांकि दिल्ली पुलिस ने दिल्ली की सारी सीमाएं सील कर दीं। राष्ट्रपति से नई संसद भवन का उद्घाटन कराने के सवाल पर सम्पूर्ण विपक्ष को केंद्र की बीजेपी सरकार ने सिरे से दरकिनार किया और पीएम मोदी ने पूरी भव्यता के साथ नई संसद भवन का उद्घाटन किया। विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया के नेतृत्व में कई पहलवानों ने जंतर-मंतर से नई संसद भवन तक विरोध मार्च निकाला। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की जिससे जमकर बवाल हुआ। विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया सहित कई पहलवानों पर सुरक्षाकर्मियों के साथ हाथापाई, दंगा करने और ड्यूटी पर तैनात पब्लिक सर्वेंट के काम में बाधा डालने का मामला दर्ज किया गया। 28 मई को दिल्ली पुलिस ने पहलवानों से जंतर-मंतर खाली करवा लिया। नई दिल्ली से पुलिस उपायुक्त ने ट्वीट कर लिखा कि "कुश्ती पहलवानों का धरना और प्रदर्शन निर्बाध तरीके से जंतर-मंतर पर चल रहा था। प्रदर्शकारियों ने तमाम आग्रह और अनुरोध के बावजूद कानून का उन्मादी तरीके से उल्लंघन किया। अतः चल रहे धरने को समाप्त करा दिया गया है"। उन्होंने कहा कि "यदि कुश्ती पहलवान भविष्य में दोबारा धरना-प्रदर्शन की अनुमति की अर्जी लगाते हैं, तो उन्हें जंतर-मंतर के अलावा अन्य उपयुक्त, सूचित स्थानों में से किसी जगह अनुमति दे दी जाएगी"। न्यूज रूम में बैठे हुए मुझे लगा कि "अब पहलवानों का आंदोलन मर गया" लेकिन फिर अचानक से एक न्यूज फ्लैश हुई कि "पहलवान अपने मेडल्स हरिद्वार जाकर गंगा में प्रवाहित करेंगे", इस बात का उन्होंने ऐलान कर दिया है। इस खबर ने पहलवानों के आंदोलन में धधकती चिंगारी का काम किया। साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया के साथ तमाम पहलवान, पत्रकार हरिद्वार पहुंचे। मेन स्ट्रीम मीडिया घड़ी-घड़ी इंतजार कर रहा था कि कब पहलवान अपने मेडल्स गंगा में प्रवाहित करेंगे। इस दौरान साक्षी मलिक का एक बड़ा ही मार्मिक वीडियो सामने आया जिसमें वे अपने मेडल्स एक बैग में भरती नज़र आईं। सभी को इंतजार था कि कब पहलवान अपने मेडल्स गंगा में प्रवाहित करेंगे। सभी अपनी आंखें टीवी पर गड़ाए हुए थे तभी अचानक से एक और खबर फ्लैश होती है कि किसान नेता नरेश टिकैत हरिद्वार पहुंच चुके हैं और फिर थोड़ी में पता चला कि पहलवान नरेश टिकैत के मनाने पर मान गए हैं और वे अपने मेडल्स अब गंगा में प्रवाहित नहीं करेंगे और नरेश टिकैत के साथ वापस आ रहे हैं। इस दौरान नरेश टिकैत ने बयान दिया कि ये "म्हारी इज्जत की बात है, पहलवानों को न्याय दिलाया जाएगा"। पहलवानों ने नरेश टिकैत को बृजभूषण के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए 5 दिनों का समय दिया। दूसरी तरफ बाराबंकी में WFI के निवर्तमान अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए बड़ी बातें बोलीं। उन्होंने कहा "बाढ़ में तैरा कैसे जाता है, हम भी जानते हैं, गंगा में मेडल्स प्रवाहित करने से बृजभूषण को फांसी नहीं मिलने वाली, आरोप सिद्ध होने पर बृजभूषण खुद ही फांसी चढ़ जाएंगे, पहलवान इमोशनल कार्ड खेल रहे हैं, गंगा में मेडल्स प्रवाहित करने की बात महज पहलवानों का इमोशनल ड्रामा है"। इसी बीच बृजभूषण ने अयोध्या में लाखों संतों के साथ 5 जून को महारैली की हुंकार भरी। बृजभूषण ने बयान दिया कि "5 जून को अयोध्या में संत बोलेंगे और पूरा देश सुनेगा"। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाली मीडिया ने बृजभूषण से एक बार भी ये सवाल नहीं किया कि "पहलवानों की WFI के अध्यक्ष से लड़ाई में संतों का क्या काम ?, स्पोर्ट्स में धार्मिक एंगल क्यों ?"। खैर, खबर मिली कि बृजभूषण ने 5 जून को अयोध्या में होने वाली संतों की महारैली को कैंसिल कर दिया। एएनआई से दिए एक बयान में उन्होंने ने कहा कि "सुरक्षा कारणों से रैली को कैसिंल किया गया है"। बृजभूषण के इस बयान के बाद पहलवानों के पक्ष में माहौल बनना तय था। बृजभूषण को बचाने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि "सरकार प्रदर्शन कर रहे पहलवानों के लिए न्याय चाहती है। हम खेल और एथलीट्स को आगे बढ़ाने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं और करते रहेंगे। हम किसी को बचा नहीं रहे हैं और ना ही किसी को बचाना चाहते हैं। भारत सरकार इस मामले में निष्पक्ष जांच चाहती है, जिससे हम कभी भी पीछे नहीं हटेंगे"। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक "गृह मंत्री अमित शाह और पहलवानों की 3 जून की रात को करीब 11 बजे एक अहम बैठक हुई जिसमें साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया शामिल थे"। अमित शाह ने पहलवानों से ऐसे समय में मुलाकात की है जब खाप पंचायतों की तरफ से केंद्र सरकार को 9 जून तक का अल्टीमेटम दिया गया है। दावा है कि अमित शाह ने पहलवानों को बिना किसी भेदभाव के जांच करने का आश्वासन दिया है।
पहलवानों मेरा यकीन है कि अब तुम इस लड़ाई को जीत जाओगे। तुमको ढेर सारी बधाई।

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