पत्रकारों की तीसरी नस्ल

"तीसरी नस्ल और भी जालिम है- पत्रकारों की। 'तलवार मुकाबिल हो तो अखबार निकालो' वालों की। ये मालिकों को गरियाते हैं लेकिन छापते वही हैं जो वह चाहता है। ये धर्मनिरपेक्ष हैं लेकिन खबरें धर्मोन्माद की छापते हैं। दंगा, हत्या, लूट-पाट, चोरी-डकैती, बलात्कार के शानदार अवसरों पर इनके चेहरे की चमक देखते बनती है।"
@काशी नाथ सिंह
('काशी का अस्सी' किताब से)

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