पृथ्वी की सुन लीजिए... पृथ्वी कुछ कह रही है...
सिर्फ कहना ये है कि प्रकृति आपको आगाह कर रही है। सुधर जाइए अन्यथा आप एक बड़ी हानि के शिकार हो सकते हैं। पढ़िए नवभारत टाइम्स की ये रिपोर्ट:
लखीमपुर खीरी जिला की मोहम्मदी तहसील से सटे मूड़ा-निजाम के पास बेला-पहाड़ा इलाके की ज़मीन में अचानक से धुआं निकलने लगा। शुरुआत में तो ये धुआं जमीन के एक छोटे से गोलाकार वृत से निकल रहा था, बाद में इसने एक बड़े आकार का रूप ले लिया और अभी मौजूदा हालात में लगभग एक बीघा जमीन इसकी हिरासत में है। आसपास के ग्रामीण लोग डरे हुए हैं। दूरदराज से आए हुए लोग भी यहाँ पर इस प्राकृतिक आपदा को देखने के लिए पहुँच रहे हैं। मोहम्मदी तहसील के तहसीलदार विकास धर दुबे ने नवभारत टाइम्स की ऑनलाइन टीम से बात करते हुए ये जानकारी दी है कि 'यह जंगली इलाका है। यहाँ खर-पतवार भारी मात्रा में पाया जाता है और घास की जड़ें ज़मीन में गहरे तक होती हैं। ज़्यादा घास-फूस होने के कारण इलाके की मिट्टी दलदली हो गई है और ज़मीन के नीचे गैस बन गई है। कुछ दिन पहले ही किसानों ने अपने खेतों में पड़े खर-पतवार में आग लगाई थी जो नीचे की जड़ों में अभी तक जल रही है और उसी का धुआँ उठ रहा है।' गाँव में एक कहावत कही जाती है कि 'ऊपर वाले की बातें ऊपर वाला ही जाने' कहकर किसी भी मसले को, किसी भी घटना को उसी के हालात पर छोड़ दिया जाता है। ऊपर जिस घटना के बारे में आपको जानकारी मिली है ये घटना दुधवा नेशनल पार्क के आसपास के एरिए की है। हाँ, ये वही दुधवा नेशनल पार्क जिस पार्क में बीते फरवरी के महीने में 09 से 11 तारीख़ के बीच में 'अंतरराष्ट्रीय पक्षी मोहत्सव' मनाया गया था। पक्षियों की प्रजातियों की खूबसूरती के लिए भी दुधवा नेशनल पार्क जाना जाता है, यहाँ पर भारतीय पक्षियों की लगभग 450 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इसके अलावा 25 प्रवासी पक्षी प्रजातियाँ भी मौसमानुसार आती-जाती रहती हैं। ये सब आपको इसलिए बता रहा हूँ कि देखिए जीवनदायिनी दृष्टि से प्रकृति हमारे लिए क्या मायने रखती है? लेकिन आपके भेजे में किसी ने भी ये बात नहीं बैठाई। प्रकृति आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण है? ये बात जब ही आपको पता चलती जब आपने ऐसे महानुभवों या कहें कि कुछ ऐसे महापुरुषों को पढ़ा होता जिन्होंने ख़ुद को प्रकृति के लिए न्योछावर कर दिया है। अरे कम से कम किसी को चाहे पढ़ा होता या न पढ़ा होता लेकिन इतना तो जान ही लिया होता कि जगदीश चंद्र बोस ने हाथ पर पौधा उगाकर ये बताया था कि पेड़ों में जीवन होता है और वो साँस लेने के साथ-साथ भोजन भी गृहण करते हैं। ये बात अगर आपकी मंद बुद्धि में फंस गई होती तो आज आप इतनी अधिक मात्रा में पेड़ों को नहीं काटते और जब आप इतनी अधिक मात्रा में पेड़ों को नहीं काटते तो आपको आज इतनी गर्मी, इतनी तेज़ तिलमिलाती धूप नहीं झेलनी पड़ती। आपने तो कमला पसंद की पुड़िया खाई और पिन्नी रोड पर फेंक दी। आपको मालूम ही नहीं है कि इस छोटी सी पिन्नी से प्रकृति को कितना बड़ा नुकसान हो सकता है? और मालूम भी है तो आप इग्नोर मार देते हैं, आप जो ठहरे बड़े आदमी, आपका कोई क्या उखाड़ लेगा, है न? लेक़िन प्रकृति से आपका ये खिलवाड़ एक दिन आपको उखाड़ कर फेंक देगा।
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